कल क्या होगा इसका
डर अब कम है;
डर है तो
पनपते कलाकार का,
पन्ने कितने भरूँगा
इसका डर है,
पन्ने भरने में
कहीं अभिनय न खोजाये
इसका डर है,
कहीं अभिनय के डर से
मैं कोई पात्र ही न समझू
इसका डर है,
और पात्र न समझने से
कहीं कलाकार ही न बनूँ
इसका डर है.
डर है तो
कहानी का,
कहानी बनेगी या नहीं
इसका डर है,
बनेगी तो बिकेगा या नहीं
इसका डर है;
बिकेगी तो लोग देखेंगे या नहीं
इसका डर है,
देखेंगे तो सराहेंगे की नहीं
इसका डर है.
डर है तो
समय का,
क्या यह सही समय है
इसका डर है,
किसके लिए कितना समय है
इसका डर है;
समय मिले तो लिखूंगा या नहीं
इसका डर है,
और न मिले तो जियूँगा या नहीं
इसका डर है.
दिन बड़े लगने लगे हैं
और रात थोड़ी कम,
दिल में बसे अँधेरे से
आँखें आज भी होती है नम;
पर यह आँखों की नमी
कभी अभिनय से न छूटे
इसका डर है,
और अभिनय से छूटे तो
कभी मेरे शब्दों से न रूठे
इसका डर है.
कल क्या होगा इसका
डर अब कम है,
डर है तो...
-
2019
डर अब कम है;
डर है तो
पनपते कलाकार का,
पन्ने कितने भरूँगा
इसका डर है,
पन्ने भरने में
कहीं अभिनय न खोजाये
इसका डर है,
कहीं अभिनय के डर से
मैं कोई पात्र ही न समझू
इसका डर है,
और पात्र न समझने से
कहीं कलाकार ही न बनूँ
इसका डर है.
डर है तो
कहानी का,
कहानी बनेगी या नहीं
इसका डर है,
बनेगी तो बिकेगा या नहीं
इसका डर है;
बिकेगी तो लोग देखेंगे या नहीं
इसका डर है,
देखेंगे तो सराहेंगे की नहीं
इसका डर है.
डर है तो
समय का,
इसका डर है,
किसके लिए कितना समय है
इसका डर है;
समय मिले तो लिखूंगा या नहीं
इसका डर है,
और न मिले तो जियूँगा या नहीं
इसका डर है.
दिन बड़े लगने लगे हैं
और रात थोड़ी कम,
दिल में बसे अँधेरे से
आँखें आज भी होती है नम;
पर यह आँखों की नमी
कभी अभिनय से न छूटे
इसका डर है,
और अभिनय से छूटे तो
कभी मेरे शब्दों से न रूठे
इसका डर है.
कल क्या होगा इसका
डर अब कम है,
डर है तो...
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2019